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तक़दीर से मिली है मोहब्बत हुसैन की / Taqdeer Se Mili Hai Mohabbat Hussain Ki

तक़दीर से मिली है मोहब्बत हुसैन की जन्नत में ले के जाएगी उल्फ़त हुसैन की रब्ब-ए-हुसैन ! वासिता प्यारे हुसैन का फ़िरदौस में 'अता हो रफ़ाक़त हुसैन की माँ फ़ातिमा तो वालिद-ए-माजिद हैं मुर्तज़ा नाना नबी हैं, ख़ूब है क़िस्मत हुसैन की शेर-ए-ख़ुदा के शेर हैं, बेहद दिलेर हैं मशहूर है जहाँ में शुजा'अत हुसैन की कुंबा लुटाया, जान भी अपनी निसार की बे-मिस्ल-ओ-बे-मिसाल शहादत हुसैन की तख़्त-ए-यज़ीद ख़ाक में मिल कर फ़ना हुआ है आज भी दिलों पे हुकूमत हुसैन की दिल में रचा ले 'इश्क़ तू ज़हरा के लाल का महशर में रंग लाएगी चाहत हुसैन की मौला 'अली के लाल का अदना ग़ुलाम हूँ निस्बत रहे, 'इलाही ! सलामत हुसैन की बू-बक्र और 'उमर के तुफ़ैल, ऐ ख़ुदा-ए-पाक ! मरने से पहले देख लू तुर्बत हुसैन की महरूम कैसे हो भला मँगता हुसैन का ख़ाली फिराना है नहीं 'आदत हुसैन की भर भर के झोलियाँ लिए जाते हैं सब गदा मशहूर है जहाँ में सख़ावत हुसैन की 'अत्तार की ये आरज़ू पूरी हो, या ख़ुदा ! इस को दिखा दे ख़्वाब में सूरत हुसैन की शायर: मुहम्मद इल्यास अत्तार क़ादरी ना'त-ख़्वाँ: हस्सान अत्तारी मदनी रज़ा...

पंद्रह सौवाँ ये मीलाद-ए-शह-ए-अबरार है | पंद्रह सौवीं है आई ईद-ए-मीलादुन्नबी / Pandra Sauwan Ye Milad-e-Shah-e-Abrar Hai | Pandra Sauwin Hai Aai Eid-e-Miladunnabi

पंद्रह सौवाँ ये मीलाद-ए-शह-ए-अबरार है 'ईद दीवानों की जश्न-ए-आमद-ए-सरकार है पंद्रह सौवीं है आई 'ईद-ए-मीलादुन्नबी झूमो सब इस्लामी भाई ! 'ईद-ए-मीलादुन्नबी पंद्रह सौवाँ ये मीलाद-ए-शह-ए-अबरार है 'ईद दीवानों की जश्न-ए-आमद-ए-सरकार है रब की रहमत ले के आई 'ईद-ए-मीलादुन्नबी ख़ूब ख़ुशियाँ साथ लाई 'ईद-ए-मीलादुन्नबी पंद्रह सौवाँ ये मीलाद-ए-शह-ए-अबरार है 'ईद दीवानों की जश्न-ए-आमद-ए-सरकार है नूर की शम'अ है रौशन, नूर की चादर तनी रौशनी हर सम्त छाई 'ईद-ए-मीलादुन्नबी पंद्रह सौवाँ ये मीलाद-ए-शह-ए-अबरार है 'ईद दीवानों की जश्न-ए-आमद-ए-सरकार है छट गए ज़ुल्मत के बादल चार-सू है रौशनी नूर की ख़ैरात लाई 'ईद-ए-मीलादुन्नबी पंद्रह सौवाँ ये मीलाद-ए-शह-ए-अबरार है 'ईद दीवानों की जश्न-ए-आमद-ए-सरकार है गुल महक उट्ठे, चली बाद-ए-बहारी वाह वाह हर कली है मुस्कुराई 'ईद-ए-मीलादुन्नबी पंद्रह सौवाँ ये मीलाद-ए-शह-ए-अबरार है 'ईद दीवानों की जश्न-ए-आमद-ए-सरकार है आमिना बीबी के घर पर नूर की बरसात है इस से हर शय जगमगाई 'ईद-ए-मीलादुन्नबी पंद्रह सौवाँ ये म...

मोहब्बत में अपनी गुमा या इलाही / Mohabbat Mein Apni Guma Ya Ilahi

मोहब्बत में अपनी गुमा, या इलाही ! न पाऊँ मैं अपना पता, या इलाही ! रहूँ मस्त-ओ-बेख़ुद मैं तेरी विला में पिला जाम ऐसा पिला, या इलाही ! मैं बेकार बातों से बच के हमेशा करूँ तेरी हम्द-ओ-सना, या इलाही ! मेरे अश्क बहते रहें, काश ! हर-दम तेरे ख़ौफ़ से, या ख़ुदा या इलाही ! तेरे ख़ौफ़ से, तेरे डर से हमेशा मैं थरथर रहूँ काँपता, या इलाही ! मेरे दिल से दुनिया की चाहत मिटा कर कर उल्फ़त में अपनी फ़ना, या इलाही ! तू अपनी विलायत की ख़ैरात दे दे मेरे ग़ौस का वासिता, या इलाही ! गुनाहों ने मेरी कमर तोड़ डाली मेरा हश्र में होगा क्या, या इलाही ! गुनाहों के अमराज़ से नीम-जाँ हूँ प-ए-मुर्शिदी दे शिफ़ा, या इलाही ! बना दे मुझे नेक नेकों का सदक़ा गुनाहों से हर-दम बचा, या इलाही ! मेरा हर 'अमल बस तेरे वासिते हो कर इख़्लास ऐसा 'अता, या इलाही ! 'इबादत में गुज़रे मेरी ज़िंदगानी करम हो करम, या ख़ुदा या इलाही ! मुसलमाँ है 'अत्तार तेरी 'अता से हो ईमान पर ख़ातिमा, या इलाही ! शायर: मुहम्मद इल्यास अत्तार क़ादरी ना'त-ख़्वाँ: हाजी मुश्ताक़ अत्तारी आसिफ़ अत्तारी mohabbat me.n...

क़िस्मत मेरी चमकाइए चमकाइए आक़ा / Qismat Meri Chamkaiye Chamkaiye Aaqa

क़िस्मत मेरी चमकाइए चमकाइए, आक़ा ! मुझ को भी दर-ए-पाक पे बुलवाइए, आक़ा ! सीने में हो का'बा तो बसे दिल में मदीना आँखों में मेरी आप समा जाइए, आक़ा ! बेताब हूँ, बेचैन हूँ दीदार की ख़ातिर लिल्लाह ! मेरे ख़्वाब में आ जाइए, आक़ा ! हर सम्त से आफ़ात-ओ-बलिय्यात ने घेरा मजबूर की इमदाद को अब आइए, आक़ा ! सकरात का 'आलम है, शहा ! दम है लबों पर तशरीफ़ सिरहाने मेरे अब लाइए, आक़ा ! वहशत है, अँधेरा है मेरी क़ब्र के अंदर आ कर ज़रा रौशन इसे फ़रमाइए, आक़ा ! मुजरिम को लिए जाते हैं अब सू-ए-जहन्नम लिल्लाह ! शफ़ा'अत मेरी फ़रमाइए, आक़ा ! 'अत्तार पे, या शाह-ए-मदीना ! हो 'इनायत वीराना-ए-दिल आ के बसा जाइए, आक़ा ! शायर: मुहम्मद इल्यास अत्तार क़ादरी ना'त-ख़्वाँ: असद रज़ा अत्तारी आसिफ़ अत्तारी अल्लामा हाफ़िज़ बिलाल क़ादरी qismat meri chamkaaiye chamkaaiye, aaqa ! mujh ko bhi dar-e-paak pe bulwaaiye, aaqa ! seene me.n ho kaa'ba to base dil me.n madina aankho.n me.n meri aap sama jaaiye, aaqa ! betaab hu.n, bechain hu.n deedaar ki KHaatir lillah ! mere KHwaab me.n aa jaaiye...

हाज़िर है दर-ए-दौलत पे गदा सरकार तवज्जोह फ़रमाएँ / Hazir Hai Dar-e-Daulat Pe Gada Sarkar Tawajjoh Farmaein

हाज़िर है दर-ए-दौलत पे गदा, सरकार ! तवज्जोह फ़रमाएँ मोहताज-ए-नज़र है हाल मेरा, सरकार ! तवज्जोह फ़रमाएँ मैं कर के सितम अपनी जाँ पर, क़ुरआन से "जाऊका" सुन कर आया हूँ बहुत शर्मिंदा सा, सरकार ! तवज्जोह फ़रमाएँ मैं कब आने के क़ाबिल था, रहमत ने यहाँ तक पहुँचाया सरकार पे तन-मन-जान फ़िदा, सरकार ! तवज्जोह फ़रमाएँ आँसू आँसू है फ़रियादी और 'अर्ज़-ए-करम हिचकी हिचकी धड़कन धड़कन देती है सदा, सरकार ! तवज्जोह फ़रमाएँ इक मैं ही नहीं, पूरी उम्मत, सारी दुनिया, सारी ख़ल्क़त तकती है रस्ता रहमत का, सरकार ! तवज्जोह फ़रमाएँ शायर: हफ़ीज़ ताइब ना'त-ख़्वाँ: ओवैस रज़ा क़ादरी मुहम्मद आसिफ़ अत्तारी मुहम्मद आरिफ़ अत्तारी haazir hai dar-e-daulat pe gada sarkaar ! tawajjoh farmaae.n mohtaaj-e-nazar hai haal mera sarkaar ! tawajjoh farmaae.n mai.n kar ke sitam apni jaa.n par qur.aan se "jaaooka" sun kar aaya hu.n bahut sharminda saa sarkaar ! tawajjoh farmaae.n mai.n kab aane ke qaabil tha rahmat ne yahaa.n tak pahunchaaya sarkaar pe tan-man-jaan fida sarkaar ! tawajjoh farmaae...

आया तयबा का चाँद चमका तयबा का चाँद | आमद-ए-मुस्तफ़ा मरहबा मरहबा / Aya Taiba Ka Chand Chamka Taiba Ka Chand | Aamad-e-Mustafa Marhaba Marhaba

सरकार की आमद ! मरहबा ! दिलदार की आमद ! मरहबा ! रसूल की आमद ! मरहबा ! बोलो नूर की आमद ! मरहबा ! हुज़ूर की आमद ! मरहबा ! यासीन की आमद ! मरहबा ! ताहा की आमद ! मरहबा ! आया तयबा का चाँद, चमका तयबा का चाँद आया तयबा का चाँद, चमका तयबा का चाँद आमद-ए-मुस्तफ़ा मरहबा मरहबा अहमद-ए-मुज्तबा ! मरहबा मरहबा या शफ़ी'-अल-वरा ! मरहबा मरहबा ख़ातमुल-अंबिया ! मरहबा मरहबा आया तयबा का चाँद, चमका तयबा का चाँद आया तयबा का चाँद, चमका तयबा का चाँद सुब्ह तयबा में हुई बटता है बाड़ा नूर का सदक़ा लेने नूर का आया है तारा नूर का मैं गदा तू बादशाह भर दे पियाला नूर का नूर दिन दूना तेरा, दे डाल सदक़ा नूर का तेरी नस्ल-ए-पाक में है बच्चा बच्चा नूर का तू है 'ऐ़न-ए-नूर, तेरा सब घराना नूर का राहत-ए-आमिना ! मरहबा मरहबा वालिद-ए-फ़ातिमा ! मरहबा मरहबा आमिना के यहाँ शाह-ए-कौन-ओ-मकाँ आए ग़ुल पड़ गया मरहबा मरहबा आया तयबा का चाँद, चमका तयबा का चाँद आया तयबा का चाँद, चमका तयबा का चाँद सर पे ताज-ए-शफ़ा'अत है जिन के वो आज आ गए मरहबा मरहबा मरहबा आए प्यारे नबी, हर तरफ़ थी ख़ुशी चार-सू शोर था मरहबा मरहबा आया तय...

रौनक़-ए-कुल-औलिया या ग़ौस-ए-आज़म दस्तगीर / Raunaq-e-Kul-Auliya Ya Ghous-e-Azam Dastagir

रौनक़-ए-कुल-औलिया, या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर ! पेशवा-ए-अस्फ़िया, या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर ! आप हैं पीरों के पीर और आप हैं रौशन-ज़मीर आप शाह-ए-अत्क़िया, या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर ! औलिया की गर्दनें हैं आप के ज़ेर-ए-क़दम या इमाम-अल-औलिया ! या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर ! थरथराते हैं, शहा ! जिन्नात तेरे नाम से है तेरा वो दबदबा, या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर ! पैदा होते ही रखे रमज़ाँ में रोज़े, दिन में दूध का न इक क़तरा पिया, या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर ! जिस तरह मुर्दे जिलाए, इस तरह, मुर्शिद ! मेरे मुर्दा दिल को भी जिला, या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर ! अहल-ए-महशर देखते ही हश्र में यूँ बोल उठे मरहबा सद-मरहबा ! या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर ! आप जैसा पीर होते क्या ग़रज़ दर दर फिरूँ आप से सब कुछ मिला, या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर ! गो ज़लील-ओ-ख़्वार हूँ, बद-कार-ओ-बद-किरदार हूँ आप का हूँ आप का, या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर ! रास्ता पुर-ख़ार, मंज़िल दूर, बन सुनसान है अल-मदद, ऐ रहनुमा ! या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर ! ग़ौस-ए-आ'ज़म ! आइए मेरी मदद के वासिते दुश्मनों में हूँ घिरा, या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-...

दावत-ए-इस्लामी है ये दावत-ए-इस्लामी है | अल्लाह की ने'मत है ये दावत-ए-इस्लामी / Dawat-e-Islami Hai Ye Dawat-e-Islami Hai | Allah Ki Neamat Hai Ye Dawat-e-Islami

दावत-ए-इस्लामी है ये दावत-ए-इस्लामी है दावत-ए-इस्लामी है ये दावत-ए-इस्लामी है अल्लाह की ने'मत है ये दावत-ए-इस्लामी आक़ा की 'इनायत है ये दावत-ए-इस्लामी दावत-ए-इस्लामी है ये दावत-ए-इस्लामी है दावत-ए-इस्लामी है ये दावत-ए-इस्लामी है 'आशिक़ान-ए-मुस्तफ़ा की दावत-ए-इस्लामी दीन है सब को सिखाती दावत-ए-इस्लामी उम्मत की है ख़ैर-ख़्वाही दावत-ए-इस्लामी बा-'अमल हम को है बनाती दावत-ए-इस्लामी रहमान की रहमत है ये दावत-ए-इस्लामी शैताँ की हलाकत है ये दावत-ए-इस्लामी दावत-ए-इस्लामी है ये दावत-ए-इस्लामी है दावत-ए-इस्लामी है ये दावत-ए-इस्लामी है 'उश्शाक़-ए-मुहम्मद की ठंडक है ये आँखों की हर दिल में सरायत है ये दावत-ए-इस्लामी फ़ैज़ान-ए-रज़ा है और ये ग़ौस का फ़ैज़ाँ है ख़्वाजा की हिमायत है ये दावत-ए-इस्लामी दावत-ए-इस्लामी है ये दावत-ए-इस्लामी है दावत-ए-इस्लामी है ये दावत-ए-इस्लामी है इस्लाम की क़ुव्वत है ये दावत-ए-इस्लामी और दीन की शौकत है ये दावत-ए-इस्लामी मौजूदा सियासत से है इस को 'इलाक़ा क्या बस नेकी की दा'वत है ये दावत-ए-इस्लामी दावत-ए-इस्लामी है ये दावत-ए-इस्लामी है द...

मेरे तुम ख़्वाब में आओ मेरे घर रौशनी होगी / Mere Tum Khwaab Mein Aao Mere Ghar Raushani Hogi

मेरे तुम ख़्वाब में आओ, मेरे घर रौशनी होगी मेरी क़िस्मत जगा जाओ, 'इनायत ये बड़ी होगी मदीने मुझ को आना है, ग़म-ए-फ़ुर्क़त मिटाना है कब, आक़ा-ए-मदीना ! दर पे मेरी हाज़री होगी बना लो अपना दीवाना, बना लो अपना मस्ताना ख़ज़ाने में तुम्हारे क्या कमी, प्यारे नबी ! होगी ग़म-ए-दूरी रुलाता है, मदीना याद आता है तसल्ली रख, ए दीवाने ! तेरी भी हाज़री होगी मुझे गर दीद हो जाए, तो मेरी 'ईद हो जाए तेरा दीदार जब होगा मुझे हासिल ख़ुशी होगी ख़ज़ाँ का सख़्त पहरा है, ग़मों का घुप अँधेरा है ज़रा सा मुस्कुरा दो गे तो दिल में रौशनी होगी इलाही ! गुंबद-ए-ख़ज़रा के साए में शहादत दे मेरी लाश उन के क़दमों में न जाने कब पड़ी होगी अगर वो चाँद से चेहरे को चमकाते हुए आए ग़मों की शाम भी सुब्ह-ए-बहाराँ बन गई होती मुझे जल्वा दिखा देना, मुझे कलमा पढ़ा देना अजल जिस वक़्त सर पर, या नबी ! मेरे खड़ी होगी अँधेरा घुप अँधेरा है, शहा ! वहशत का डेरा है करम से क़ब्र में तुम आओगे तो रौशनी होगी मेरे मरक़द में जब, 'अत्तार ! वो तशरीफ़ लाएँगे लबों पर ना'त-ए-शाह-ए-अंबिया उस दम सजी होगी शायर: मुहम्मद इल्यास अत्तार क़ादरी ना'...

मुबारक मुबारक हुज़ूर आ रहे हैं / Mubarak Mubarak Huzoor Aa Rahe Hain

हुज़ूर आ रहे हैं, हुज़ूर आ रहे हैं मरहबा ! मरहबा ! मरहबा ! मरहबा ! मुबारक ! मुबारक ! हुज़ूर आ रहे हैं मुबारक ! मुबारक ! हुज़ूर आ रहे हैं न क्यूँ आज झूमें कि सरकार आए ख़ुदा की ख़ुदाई के मुख़्तार आए न क्यूँ बारह्वीं पे हमें प्यार आए कि आए इसी रोज़ सरकार आए मुबारक ! मुबारक ! हुज़ूर आ रहे हैं मुबारक ! मुबारक ! हुज़ूर आ रहे हैं हुज़ूर की आमद ! मरहबा ! पुर-नूर की आमद ! मरहबा ! सादिक़ की आमद ! मरहबा ! अमीन की आमद ! मरहबा ! मुसर्रत से हम क्यूँ न धूमें मचाएँ हमारे शहंशाह-ओ-सरदार आए मुसलमानो ! सुब्ह-ए-बहाराँ मुबारक वो बरसाते अनवार सरकार आए मुबारक ! मुबारक ! हुज़ूर आ रहे हैं मुबारक ! मुबारक ! हुज़ूर आ रहे हैं मुबारक तुझे, आमिना ! हो मुबारक तेरे घर शहंशाह-ए-अबरार आए मुबारक, हलीमा ! तुझे भी मुबारक तेरे घर में नबियों के सरदार आए मुबारक ! मुबारक ! हुज़ूर आ रहे हैं मुबारक ! मुबारक ! हुज़ूर आ रहे हैं 'अदद हम को बारह का क्यूँ हो न प्यारा कि बारह को दुनिया में सरकार आए दुरूदों के गजरे लिये अब बढ़ो तुम वो आए रसूलों के सालार आए मुबारक ! मुबारक ! हुज़ूर आ रहे हैं मुबारक ! मुबारक ! हुज़ूर आ ...